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Thursday, March 14, 2013

न्यायपालिका और विधायिका के बीच टकराव


पड़ोसी देश में न्यायपालिका और विधायिका के बीच की  टकराहट ने पूरे बिश्व का ध्यान खींचा है.एक पूर्व प्रधान मंत्री तो फांसी पर लटका दिए  गए . अनेक बर्तमान नेता बिदेश में प्रवास कर अपने पक्ष में अनुकूल माहौल बनने-बनाने का इंतज़ार कर रहे हैं.
मुख्य न्यायाधीश इफ्तिखार चौधरी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय सुप्रीम कोर्ट पीठ ने सरकार से औपचारिक मंजूरी के बिना शैक्षिक योग्यता, कर भुगतान और उम्मीदवारों की दोहरी नागरिकता से संबंधित नियमों में संशोधनों के चुनाव आयोग के प्रयासों का समर्थन किया था।. पीठ ने चुनाव आयोग को कानून मंत्रालय की स्वीकृति बिना अपने नियमों में बदलावों पर आगे बढ़ने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व फैसले में इसकी अनुमति दी गई थी।
कानून मंत्री फारुक नाइक ने कहा कि इस प्रकार के संशोधनों को पहले राष्ट्रपति की मंजूरी मिलनी चाहिए। सांसदों ने नामांकन पत्रों में बदलाव का विरोध किया है ।
विशेषज्ञों का कहना है कि शीर्ष अदालत के फैसले ने राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना संशोधित नामांकन पत्रों को छापने के चुनाव आयोग के फैसले को कानूनी चुनौती देने के रास्ते बंद कर दिए हैं।
मई में शांतिपूर्ण चुनाव कराने के लिए सेना की तैनाती को लेकर पाकिस्तानी सेना और चुनाव आयोग के बीच बैठक जल्द होगी। इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन के प्रमुख मेजर जनरल असीम सलीम बाजवा ने कहा, 'हमने चुनाव आयोग को समर्थन और सुरक्षा प्रदान करने का आश्वासन दिया है।'
पाकिस्तानी चुनाव आयोग ने सरकार के विरोध को दरकिनार करते हुए संशोधित नामांकन पत्रों को छपवाने के अपने फैसले पर आगे बढ़ने का फैसला किया है।
पूर्व के घटनाक्रम के लिए देखे ( http://goo.gl/ezLy2http://goo.gl/YL0b4 )

बिधायिका व कार्यपालिका में तो आये दिन टकराव देखने को मिलता है.    
पश्चिम बंगाल  राज्य के चर्चित आइपीएस अफसरों में शुमार नजरूल इस्लाम ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भ्रष्टाचारियों की आश्रयदाता बताया है। उन्होंने यह टिप्पणी मुख्यमंत्री को लिखे 76 पेज के पत्र में की है। यह पत्र नजरूल ने पिछले दिनों ममता ने उन्हें जन्मदिन पर भेजे शुभकामना संदेश के जवाब में लिखा है। मुख्यमंत्री बनने के बाद ममता ने नजरूल को वक्फ बोर्ड का चेयरमैन पद संभालने को कहा था। जब वह तैयार नहीं हुए तो मुख्यमंत्री क्षुब्ध हो गई। यह सब बातें लिखने के बाद नजरूल ने लिखा है कि इसी कारण से पिछले डेढ़ वर्ष में कई बार उन्हें महत्वहीन पदों पर तबादला किया गया। इतना ही नहीं उनकी लिखी किताब को गलत बता कर उन्हें शोकाजचार्जशीट देने के साथ उनकी पदोन्नति भी रोक दी गई है।
इसी तरह नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैगने अपनी रपट में कोयला खदानों के आवंटन में मनमानी का आरोप लगाने के साथ एक लाख 86 हजार करोड़ रुपये की राजस्व हानि की बात कही थी। कोयला खदान आवंटन की जांच कर रही सीबीआइ ने सुप्रीम कोर्ट को सौंपी प्रगति रपट में कहा है कि खदानों का आवंटन मनमाने तरीके से और बिना छानबीन के किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इसको प्रथमदृष्टया सही मानते हुए कहा है कि ऐसा लगता है कि आवंटन में नियमों का पालन नहीं हुआ। न्यायमूर्ति आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कहाअगर केंद्र ने आवंटन के आवेदकों के साथ तय प्रक्रिया का पालन नही किया तो पूरा आवंटन रद होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की परेशानी बढ़ाते हुए सीबीआइ को यह भी हिदायत दी कि वह अपनी जांच से जुड़ी जानकारी राजनीतिक नेतृत्व यानी सरकार से साझा न करे।
·         इसके बिपरीत नेपाल में मुख्य न्यायाधीश रेगमी प्रधानमंत्री बने
 नेपाल के मुख्य न्यायाधीश खिलराज रेगमी कार्यकारी सरकार के मुखिया होंगे। उन्होंने गुरुवार को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली। कार्यकारी सरकार के नेतृत्व में 21 जून को चुनाव कराए जाएंगे। इसके साथ ही महीनों से चला आ रहा राजनीतिक और संवैधानिक संकट समाप्त हो गया है। नेपाल के राजनीतिक इतिहास में यह पहला मौका है जब वर्तमान मुख्य न्यायाधीश को सरकार प्रमुख बनाया गया है।
तीन प्रमुख राजनीतिक दलों और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक मधेसी फ्रंट [यूडीएमएफ] के शीर्ष नेताओं ने बुधवार को चुनावों की देखरेख के लिए कार्यकारी सरकार गठित करने को लेकर 11 सूत्रीय समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। जिसके तहत 63 वर्षीय रेगमी ने कार्यकारी सरकार के प्रमुख के तौर पर शपथ ली।